क़ानून की हुक्मरानी
लिखारी
मख़दूम टीपू सलमान (लाहौर)
क़ानून की हुक्मरानी किसी भी इन्साफ़ पर खड़े समाज को बनाने के लिए ज़रूरी है। क़ानून की हुक्मरानी का मतलब है कि रियासत में हर काम क़ानून के तहत और क़ानून की मर्ज़ी के मुताबिक़ होगा। हकूमत क़ानून के मुताबिक़ चलेगी और हर फ़ैसला क़ानून के मुताबिक़ होगा। यानी इन्साफ़ का मयार ये होगा कि फ़ैसला क़ानून की मरज़ी से हो। देखने की बात ये है कि ऐसा क्यों और कैसे किया जाता है।
क़ानून की हुक्मरानी की दो बुनियादी ज़रूरतें होती हैं। क़वानीन का होना और क़वानीन की बरतरी।









